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Friday, October 14, 2022

करवाचौथ - प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे

#कलमरथ परिवार
#दिनाँक-13/10/2022
#विषय--करवा चौथ 
#विधा--कुंडलिया
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(1)
पावनता उर में लिए,करती नारी पर्व।
नारी के सद्भाव पर,करता हर इक गर्व।।
करता हर इक गर्व,नार तो प्रीति निभाती।
हो अखंड सौभाग्य,चौथ को देव मनाती।।
नारी गहती धर्म,इसी से है मानवता।
जब तक करवा चौथ,रहेगी नित पावनता।।
(2)
नारी करवा चौथ पर,नीर बिना उपवास।
नारी में तेजत्व है,हो जाता आभास।।
हो जाता आभास,अमर सिन्दूर बनाती।
माता करवा चौथ,हर्ष से नित भर जाती।।
दाम्पत्य खुशहाल,सुवासित दुनिया सारी।
सावित्री-सा तेज,धारती हर इक नारी।।
(3)
नारी तो सम्पूर्ण है,रीति,नीति अरु धर्म।
नैतिकता की लाज है,है शुचिता का मर्म।।
दाम्पत्य को नेह से,देती सदा बुहार।
नारी ने फैला दिया,है सतीत्व-उजियार।।
है अंतर बलवान,कभी भी वह नहिं हारी।
सचमुच में बलवान,जगत में सबसे नारी।।
(4)
पूजा करवा चौथ पर,करती पावन नार।
पूजा से बनता प्रखर,नारी का संसार।।
सुखद नार- संसार,नारियाँ धर्म मनाती।
करती दैविक मान,सदा खुशियों को पाती।।
नारी में देवत्व,कोय नहिं उससा दूजा।
चाहे सदा सुहाग,नार करती नित पूजा।।

             -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे
                           प्राचार्य
शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
                         मंडला,मप्र-481661 
               (मो.94245484382)
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      प्रमाणित किया जाता है कि प्रस्तुत रचना मौलिक व अप्रकाशित है-प्रोशनाखरे)