शीर्षक - करवा चौथ
कुकुभ छंद आधारित गीत
16,14 मात्राएं पदांत-22 अनिवार्य
व्रत करवा चतुर्थ सुखदायी , गणपति नाथ पुकारा है ।
सुखद घड़ी पावन है आयी , श्रृंगार किया प्यारा है ।।
सरगी सासू माँ देती हैं , शुभकामना संग ढेरों
भोर पूर्व ही सरगी खाएँ , उल्लासी खुशियाँ ढेरों
सोलह श्रृंगार सज सजाये , दर्पण नज़र उतारा है ।
सुखद घड़ी पावन है आयी , श्रृंगार किया प्यारा है ।।
बिछुवे मेहंदी अरु चूड़ी , अखंड सौभाग्य निशानी
प्रिय ख़ातिर ईश्वर से झगड़े , रख वचन लाज़ की ठानी
अँधियारे नीरस जीवन का , प्राणप्रिये उजियारा हैं ।
सुखद घड़ी पावन है आयी , श्रृंगार किया प्यारा है ।।
रखना माँग अमिट सिन्दूरी , उमर सुखद समृद्धि माँगे
वरदान सुहागिन मरने का , जन्म-जन्म प्रिय को माँगे
मेरे जीवन का चमकीला , मनमीत ही सितारा हैं ।
सुखद घड़ी पावन है आयी , श्रृंगार किया प्यारा है ।।
#अनामिका_वैश्य_आईना
#लखनऊ
No comments:
Post a Comment